॥ छिन्नमस्ताकवच ॥

भगवती वज्रवैरोचनी की उपासना गुरुगम्य तथा दुर्लभ हैं। श्री छिन्नमस्ता का एक लघु कवच पोस्ट कर रहा हूं ,इस कवच के पारायण से भगवती वज्रसुन्दरी का अनुग्रह प्राप्त होता है तथा कष्ट, सङ्कट, शत्रुबाधा आदि का निग्रह होता हैं ।

हूं बीजात्मिका देवी मुण्डकर्तृधरापरा । हृदयँ पातु सा देवी वर्णिनी डाकिनीयुता ॥१॥ श्रीं ह्रीं हुँ ऐं चैव देवी पुर्वस्यां पातु सर्वदा । सर्वाङ्गं मे सदा पातु छिन्नमस्ता महाबला ॥२॥ वज्रवैरोचनीये हूं फट् बीजसमन्विता । उत्तरस्यां तथाग्नौ च वारुणे नैर्ऋतेऽवतु ॥३॥ इन्द्राक्षी भैरवी चैवासितांगी च संहारिणी । सर्वदा पातु मां देवी चान्यान्यासु हि दिक्षु वै ॥४॥ इदं कवचमज्ञात्वा यो जपेच्छिन्नमस्तकाम्। न तस्य फलसिद्ध: स्यात् कल्पकोटिशतैरपि ॥५॥

One thought on “॥ छिन्नमस्ताकवच ॥

  1. This symbolic picture depicts the kundalini jagriti stages of aaroh-avaroh with ashtachakra bhedan.The sahashrar stage is depicted with removal of head and ida sushumna and pingla are fed through amrita.This stage is received when you stand right over ardh nareshwar.

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