भगवती हंसतारा

जय मां तारा

कालीमंत्रक्रमान्तर्गत जिस प्रकार कालीकुलसाधक भगवती हंसकाली की उपासना करते है, उसी प्रकार ताराकुल साधकों के मध्य भगवती हंसतारा की उपासना का प्रचलन हैं ।

हंसतारा महाविद्या तव स्नेहात् प्रकाशिता ।
कविता सा वशेत् पुंसां धनार्थी धनमाप्नूयात् ।
मोक्षार्थी लभते मोक्षं नात्र कार्या विचारणा ॥

स्वच्छंदसंग्रह में भगवान शिव ने भगवती हंसतारा को आज्ञासिद्धि, त्रैलोक्यवशीकरण, चौदह प्रकार की विद्या , कवित्व, धनधान्य तथा मोक्ष प्रदान करने वाली महाविद्या कहा हैं ।

आज्ञासिद्धिमवाप्नोति त्रैलोक्यं वशमानयेत् । वशमायास्ति सततं तस्य विद्याश्चचतुर्दश ॥

ताराकुल में विशिष्ट सिद्धिप्रद होने के कारण, मात्र अधिकारी साधकों को यह महाविद्या गुरुप्रसाद तथा देवता के अनुग्रह से प्राप्त होती हैं । यह महाविद्या अत्यन्त गोपनीय है, इसलिए पद्धतिकार तथा निबन्धकार भी इनका विशेष उल्लेख करने से सकुचाते हैं। भगवती हंसतारा का ध्यान इस प्रकार हैं-

” सकलविद्यामय हंस की पृष्ट पर भगवान अक्षोभ्य विराजमान है, उन्हीं के अंक में चतुर्भुजा भगवती हंसतारा विराजमान हैं । इनकी कान्ति श्वेतस्फटिक के सामन हैं । भगवती की आभा शीतल चंद्रप्रकाश जैसी हैं। “

हंसमंत्र की अधिष्ठाता देवता होने के कारण तथा हंसारूढ होने के कारण भगवती तारिणी के इस स्वरूप को हंसतारा अभिधान किया गया । भगवती हंसतारा की उपासना त्र्याक्षरी , सप्ताक्षरी अष्टाक्षरी , नवाक्षरी तथा सार्द्धपञ्चाक्षरी विद्या से होती हैं । ये सभी मंत्र गुरुगम्य है, उन्हीं के श्रीमुख से इनका ज्ञान प्राप्त कर साधना करना श्रेयस्कर होता हैं । विशेष जिज्ञासुजनों को तारिणीमंत्रकल्प, रुद्रयामल ताराखण्ड, स्वच्छंदसंग्रह तथा श्रीरघुनंदन तर्कवागीश महाशय कृत आगमतत्वविलास के तारा प्रकरण का अवलोकन करना चाहिए । भगवती हंसतारा की आवरणपूजा तथा पूजापद्धति कुछ परिवर्तनों के साथ श्रीउग्रतारा के सामान हैं ।

बौद्ध हंसताराप्रतिमा

इनकी उपासना महाचीनक्रम की विधि से करना चाहिएं तभी साधक को सिद्धि प्राप्त होती हैं । तारामन्त्रक्रम में साधक को हंसषोढान्यास का अधिकार हंसतारा उपासना के पश्चात ही प्राप्त होता हैं । स्वतन्त्ररूप से उपासना करने पर भगवती हंसतारा का साधक भोग तथा मोक्ष दोनों सहज ही प्राप्त कर लेता हैं ।
ध्यायेत्कोटिदिवाकरद्युतिनिभान्बालेन्दुयुक्छेखरां
रक्ताङ्गीं रसनां सुरक्तवसनाम्पूर्णेन्दुबिम्बाननाम्।
पाशङ्कर्तृमहाङ्कुशादि दधतीन्दोर्भिश्रतुर्भिर्युतान्
नानाभूषणभूषिताम्भगवतीन्ताराञ्जगत्तारिणीम् ॥
वासन्तीय नवरात्रपर्व की अनेकों शुभकामनाओं सहित……🙏

ॐ हंसतारे वज्रपुष्पं प्रतिच्छ हूँ फट् स्वाहा ॥