चण्डिकादण्डकस्तोत्रम्

ॐ नमश्चण्डिकायै॥

ऊं ऊं ऊं उग्रचण्डं चचकितचकितं चंचला दुर्गनेत्रं हूँ हूँ हूंकाररूपं प्रहसितवदनं खङ्गपाशान् धरन्तम्। दं दं दं दण्डपाणिं डमरुडिमिडिमां डण्डमानं भ्रमन्तं भ्रं भ्रं भ्रं भ्रान्तनेत्रं जयतु विजयते सिद्धिचण्डी नमस्ते॥ १॥

घ्रं घ्रं घ्रं घोररूपं घुघुरितघुरितं घर्घरीनादघोषम् हुं हुं हुं हास्यरूपं त्रिभुवनधरितं खेचरं क्षेत्रपालम्। भ्रूं भ्रूं भ्रूं भूतनाथं सकलजनहितं तस्य देहा पिशाचं हूँ हूँ हूंकारनादैः सकलभयहरं सिद्धिचण्डी नमस्ते॥ २॥

व्रं व्रं व्रं व्योमघोरं भ्रमति भुवनतः सप्तपातालतालं
क्रं क्रं क्रं कामरूपं धधकितधकितं तस्य हस्तेत्रिशूलम्। द्रुं द्रुं द्रुं दुर्गरूपं भ्रमति च चरितं तस्य देहस्वरूपं मं मं मं मन्त्रसिद्धं सकलभयहरं सिद्धिचण्डी नमस्ते॥ ३॥

झं झं झंकाररूपं झमति झमझमा झंझमाना समन्तात् कं कं कंकालधारी धुधुरितधुरितं धुन्धुमारी कुमारी। धूं धूं धूं धूम्रवर्णा भ्रमति भुवनतः कालपास्त्रिशूलं तं तं तं तीव्ररूपं मम भयहरणं सिद्धिचण्डी नमस्ते॥ ४॥

रं रं रं रायरुद्रं रुरुधितरुधितं दीर्घजिह्वाकरालं पं पं पं प्रेतरूपं समयविजयिनं शुम्भदम्भे निशुम्भे।संग्रामे प्रीतियाते जयतु विजयते सृष्टिसंहारकारी ह्रीं ह्रीं ह्रींकारनादे भवभयहरणं सिद्धिचण्डी नमस्ते॥ ५॥

हूंकारी कालरुपी नरपिशितमुखा सान्द्ररौद्रारजिह्वा हूँकारी घोरनादे परमशिरशिखा हारती पिङ्गलाक्षे । पङ्के जाताभिजाते चुरु चुरु चुरुते कामिनी काण्डकण्ठे कङ्काली कालरात्री भगवति वरदे सिद्धिचण्डी नमस्ते॥ ६॥

ष्ट्रीं ष्ट्रीं ष्ट्रींकारनादे त्रिभुवननमिते घोरघोरातिघोरं कं कं कं कालरूपं घुघुरितघुरितं घुं घुमा बिन्दुरूपी। धूं धूं धूं धूम्रवर्णा भ्रमति भुवनतः कालपाशत्रिशूलं तं तं तं तीव्ररूपं मम भयहरणं सिद्धिचण्डी नमस्ते॥७॥

झ्रीं झ्रीं झ्रींकारवृन्दे प्रचरितमहसा वामहस्ते कपालं खं खं खं खङ्गहस्ते डमरुडिमडिमां मुण्डमालासुशोभाम् । रुं रुं रुं रुद्रमालाभरणविभूषिता दिर्घजिह्वा कराला देवि श्री उग्रचण्डी भगवति वरदे सिद्धिचण्डी नमस्ते॥ ८॥

आरुणवर्णसङ्काशा खड्गफेटकबिन्दुका। कामरूपी महादेवी उग्रचण्डी नमोऽस्तुते॥९॥

॥ श्रीचण्डिकादण्डकस्तोत्रं समाप्तम् ॥

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॥ सरलशिवपूजाप्रयोग: ॥

साधक शुद्ध वस्त्र पहनकर शास्त्र विहित आसान पर बैठे । आधारशक्ति कमलासनाय नमः कहकर आसान का पूजन करे । 
शिवाय नमः  इस मंत्र से भस्म के त्रिपुण्ड्र सर ,कण्ठ ,ह्रदय ,दोनों बाहुओं और नाभि पे धारण करे । 
शिवाय नमः इस मंत्र से रुद्राक्ष की माला वा एक रुद्राक्ष या एक से ज्यादा रुद्राक्ष धारण करे ।
शिवाय नमः कहकर  तीन बार आचमन करे । शिवाय नमः कहकर तीन बार प्राणायाम करे । 
शिवाय नमः कहकर शैव पवित्र वा स्मार्त पवित्र वा सोने /चाँदी/ताम्बे की अंगूठी (बिना नग वाली ) ।  फिर शिव पूजा का संकल्प करे ।

निम्न मन्त्र से आवाहन करे । ( अगर प्रतिमा प्राण प्रतिष्ठित हो तो यहाँ पुष्पांजलि देवे )

शूलपाणये नमः आवाहनं समर्पयामि ॥
निम्न मंत्र से पुष्प वा दर्भ का आसान समर्पित करे । 
पिनाकधृषे नमः आसनं समर्पयामि ॥
निम्न मंत्र से लिंग के उर्ध्वभाग पर  अर्घ्य समर्पित करे । 
भवोद्भवाय नमः अर्घ्यं समर्पयामि ॥ 
निम्न मंत्र से आचमनीय जल  समर्पित करे । 
वामदेवाय नमः आचमनीयं समर्पयामि ॥  
निम्न मन्त्र से मधुपर्क समर्पित करे ।
ज्येष्ठाय नमः मधुपर्कं समर्पयामि ॥ 
निम्न मन्त्र से दुग्ध का स्नान करावे । 
ईश्वराय नमः पय:स्नानं समर्पयामि ॥ 
निम्न मन्त्र से दही का स्नान करावे ।
शिवाय नमः दधिस्नानं समर्पयामि ॥ 
निम्न मन्त्र से घृत का स्नान करावे ।
गिरिशाय नमः घृतस्नानं समर्पयामि ॥
निम्न मन्त्र से मधु(शहद) का स्नान करावे ।
उमाधवाय नमः मधुस्नानं समर्पयामि॥              निम्न मन्त्र से शर्करा का स्नान करावे ।
शिवाय नमः शर्करा स्नानं समर्पयामि ॥
जल से अभिषेक करे ।
महेश्वराय नमः अभिषेकं समर्पयामि ॥
निम्न मन्त्र से दो श्वेत वस्त्र वा दो श्वेतसूत्र वा अक्षत समर्पित करे । 
श्रेष्ठाय नमः वस्त्रं समर्पयामि ॥ 
निम्न मंत्र से यज्ञोपवित (जनेऊ ) समर्पित करे ।
रुद्राय नमः उपवीतं समर्पयामि ॥  निम्न मंत्र से चन्दन समर्पित करे ।
कालाय नमः चन्दनं समर्पयामि ॥ 
निम्न मंत्र से अक्षता समर्पित करे ।
कलविकरणाय नमः अक्षता समर्पयामि ॥  
निम्न मंत्र से आँकड़े (अर्क)तथाधतूरे(,धर्तूर)के ,गेंदे (शतपत्र) ,गुलाब (पाटलपुष्प) इत्यादि के पुष्प समर्पित करे ।
बलविकरणाय नमः पुष्पं समर्पयामि ॥
निम्न मंत्र से बिल्व पत्र सर्मपित करे ।
बलविकरणाय नमः बिल्वपत्रंसमर्पयामि ॥ 
निम्न मंत्र से धुप सर्मपित करे ।
बलाय  नमः धूपं समर्पयामि ॥ 
निम्न मंत्र से घी का ( तैल का निषेध ) दीपक सर्मपित करे ।
बलप्रमथाय नमः दीपं समर्पयामि ॥
निम्न मंत्र से शुद्ध यथाशक्ति नैवेद्य समर्पित करे  ।
सर्वभूतदमनाय नमः नैवेद्यं समर्पयामि ॥ 
निम्न मंत्र से आचमनीय जल समर्पित करे ।
मनोन्मनाय नमः आचमनीयं समर्पयामि ॥
निम्न मंत्र से मध्यपानीय जल समर्पित करे ।
मनोन्मनाय नमः मध्येपानीयं समर्पयामि ॥
निम्न मंत्र से उत्तरापोशनं समर्पित करे ।
मनोन्मनाय नमः उत्तरापोशनं समर्पयामि ॥ 
निम्न मन्त्र से ताम्बूल समर्पित करे । 
शम्भवे नमः ताम्बूलं समर्पयामि ॥ 
शम्भवे नमः दक्षिणां समर्पयामि ॥ 
शङ्कराय नमः फलं समर्पयामि ॥ 

शङ्कराय नमः प्रदक्षिणां समर्पयामि ॥     शङ्कराय नमः उत्तरनीराजनं समर्पयामि ॥भवानीशंकराय नमः मन्त्रपुष्पञ्जलिं  समर्पयामि ॥ शम्भवे नमः नमस्कारान् समर्पयामि ॥        यस्यस्मृति ० ॥